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ईर्ष्यालु दुर्योधन अर्जुन इन्द्र के पास से अनेक दिव्यास्त्र लेकर वापस लौटे। अर्जुन को वापस आया देखकर उसके भाई, माता कुंती और द्रोपदी प्रसन्न हो उठे…
भीम और हनुमान अर्जुन को दिव्यास्त्रों की प्राप्ति के लिए हिमालय पर तपस्या करने के लिए भेजकर पाण्डवों के लिए समय काटना भारी पड़ रहा था। वे ऋषि धौम्…
पाण्डवों का वनवास पाण्डवों के जाने के बाद शकुनि ने दुर्योधन को भड़काया— “भांजे! तुम्हारी जीती राशि को जीजाश्री ने लौटाकर अच्छा नहीं किया। अब तुम दे…
द्यूत-क्रीड़ा का आयोजन और द्रोपदी चीर-हरण हस्तिनापुर पहुंचने के बाद भी शकुनि की आंखों के सामने से युधिष्ठिर का राज-वैभव हट नहीं रहा था। दुर्योधन के…
राज्य विभाजन और इन्द्रप्रस्थ का निर्माण द्रोपदी स्वयंवर में अर्जुन विजय का समाचार हस्तिनापुर में सबसे पहले विदुर को मिला। विदुर अत्यन्त प्रसन्न हो…
द्रोपदी-स्वयंवर एकचक्रा नगरी में रहते हुए पाण्डवों को काफी समय बीत गया था, तभी उन्होंने सुना कि पांचाल नरेश द्रुपद अपनी पुत्री द्रोपदी का स्वयंवर क…
बकासुर वध एकचक्रा नगरी में पाण्डव बड़ी कठिनाई से अपना जीवनयापन कर रहे थे। उस नगरी के समीप एक गुफा में एक अत्याचारी राक्षस रहता था। वह पिछले तेरह वर…
लाक्षागृह हस्तिनापुर की राज्य सभा में एक दिन विदुर ने युवराज पद के लिए प्रश्न उठाते हुए कहा– “महाराज! पाण्डु पुत्र युधिष्ठिर अब युवा हो गए हैं। हस्…
रंगभूमि जब आचार्य द्रोण ने राजकुमारों को शस्त्र विद्या में पारंगत कर दिया, तब उन्होंने कृपाचार्य, भीष्म, व्यास, विदुर और धृतराष्ट्र से कहा– “महारा…
गुरु द्रोणाचार्य आचार्य द्रोण महर्षि भरद्वाज के पुत्र थे। अपने पिता के साथ रहकर उन्होंने समस्त वेद-वेदांतों का और धनुर्विद्या का गहन अध्ययन किया था…