संचार मीडिया का अर्थ, परिभाषाएं, प्रकार एवं उद्देश्य | Meaning of Mass Media, Definition, Types, Uses and Objectives in hindi

संचार एक मूर्त तत्त्व है जो सूचना के स्वरूप द्वारा निर्धारित किया जाता है। यह सन्देश सूचना का रूप है। 'मीडिया' (Media) शब्द लॅटिन भाषा से लिया गया है

जन-संचार अथवा जन-संपर्क (Mass Communication)

संचार एक मूर्त तत्त्व है जो सूचना के स्वरूप द्वारा निर्धारित किया जाता है। यह सन्देश सूचना का रूप है। 'मीडिया' (Media) शब्द लॅटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है 'मध्य' (between) मार्शल मकलुहन (Marshall McLuhan) के अनुसार, "संचार मनुष्य के लिए वह साधन है जो उसे उन लोगों को प्रभावित करने के योग्य बनाता है जो उसके आमने-सामने सम्पर्क में नहीं हैं।" सूचना में संचार विभिन्न साधनों का सामंजस्य है। यह साधनों का बहुरूप है। प्रकाशित और अप्रकाशित कई संचार साधन है। विशेषतया इन्हें अनुदेशनात्मक संचार साधन समझा जाता है, क्योंकि ये अनुदेशात्मक उद्देश्य से सन्देश देते हैं। इन साधनों द्वारा एक ही समय में अनगिनत व्यक्तियों के साथ एकतरफा सम्प्रेषण होता है अर्थात् सम्प्रेषणकर्त्ता को मूल पोषण प्राप्त नहीं होता है।

Meaning of Mass Media

संचार की प्रक्रिया जब एक विशाल जनसमूह के साथ होती है तो उसे जनसंचार या जन-संपर्क कहते हैं। संचार एवं माध्यम शब्दावलियों के साथ एक नए शब्द मास (MASS), जन का समावेश किया गया है। यद्यपि जनसंचार शब्द का बहुमात्र उत्पादन (Mass Production) और जन वितरण (Mass Distribution) के साथ समानता का बोध होता है किन्तु जनसंचार एवं जन-माध्यम को कल्पना अपेक्षाकृत नयी है।

संचार का तात्पर्य भावों, विचारों, सूचनाओं का व्यक्तियों के बीच में आदान-प्रदान से है। संचार की प्रक्रिया तब आरम्भ होती है जब एक व्यक्ति का दिमाग इस प्रकार कार्य करता है कि दूसरे व्यक्ति के दिमाग पर उसका असर न पड़े। इस प्रकार दूसरे व्यक्ति का दिमाग वैसा ही अनुभव करने लगता है जैसा कि पहले व्यक्ति का दिमाग। यही अनुभव संचार कहलाता है। अनुभव बांटने की प्रक्रिया भिन्न हो सकती है। संचार की भाषा में इसे प्रतिपुष्टि (Feed Back) कहा जाता है। आधुनिक समय में भी संचार का सफल क्रियान्वयन इसी प्रक्रिया के आधार पर जांचा जाता है। इस प्रकार हम पाते है कि संचार को प्रथम परिभाषा में भी 'प्रभाव' की महत्ता है और वर्तमान में भी 'प्रभाव' ही संसार की सफलता का मानक है।

जनसंचार साधन का अर्थ (Meaning of Mass Media)

जनसंचार साधन का अर्थ वह संचार साधन है जो जनसाधारण को किसी विषय में सूचित करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। इन्हें एक माध्यम के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है जिसके द्वारा विचार, मनोवृत्तियाँ और प्रभाव निरन्तर लोगों तक पहुंचाए जाते हैं। जनसंचार साधन सन्देश गुणक है। ये प्रसारण के वे साधन है जो सन्देशों की संख्या, गति और दर्शकों के आकार में वृद्धि करते हैं।

जैसे यह पहले ही वर्णन किया गया है कि न केवल पुस्तकें, अखबार, मैगजीन, जर्नल, पम्फलेट एटलस, शब्दकोश और इनसाइक्लोपीडिया आदि प्रकाशित संचार साधन है बल्कि रेडियो, टेलीविजन, फिल्मे, कम्प्यूटर, इण्टरनेट, ई-मेल, वीडियो डिस्क और टेलीकान्फ्रेसिंग आदि अप्रकाशित संचार साधन भी है। इसके लिए शिक्षा तकनीकी ने दूरवतों और दुर्गम बहुसंख्यक विद्यार्थियों तक पहुंचने, असहायों की शिक्षा की सुविधाओं में असमानता को दूर करने और उनके शैक्षणिक स्थान पर ही सुविधा और आवश्यकतानुसार सिखलाई देने के लिए विभिन्न प्रकार के जनसंचार साधन प्रस्तुत किए हैं।

संचार की मुख्य परिभाषाएं (Definitions of Communication)

जार्ज ए. मिलर के अनुसार, जनसंचार का तात्पर्य सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना है।

एमसे मोटगु और फ्लोएड मेन्स ने कहा, वह असंख्य ढंग जिससे मानवता से सम्बन्ध रखा जा सकता है, केवल शब्दों या संगीत, चित्रों या मुद्रण द्वारा, इशारों या अंग प्रदर्शन द्वारा शारीरिक मुद्रा या पक्षियों के घरों से सभी को आँखों तथा कानों तक संदेश पहुंचाना ही जनसंचार कहलाता है।

एडवर्ड सिल्स और डेविड एम. राइट के अनुसार, जनसंचार विश्व के लिए एक झरोखा प्रदान करता है। जनसंचार के द्वारा जो चीजें आम आदमी को उपलब्ध नहीं थी, अब होने लगी। जनसंचार एक ऐसा सम्पर्क है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक बहुगुणित रूप से स्थापित होता है।

उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि जनसंचार एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दो या दो से अधिक लोगों के बीच विचारों, अनुभवों तथ्यों और प्रभावों का इस प्रकार से आदान-प्रदान होता है जिससे दोनों को संदेश के बारे में पर्याप्त जान हो जाए। किसी तथ्य, सूचना, ज्ञान, विचार और मनोरंजन को व्यापक ढंग से जनसामान्य तक पहुँचाने की प्रक्रिया हो जनसंचार है। समान लक्ष्य की प्राप्ति और पारस्परिक मेल-जोल के लिए जनसंचार अपरिहार्य है। आधुनिक जन जीवन और सांस्कृतिक, आर्थिक-सामाजिक व्यवस्था का ताना-बाना जन संचार माध्यमों द्वारा सुव्यवस्थित है। जनसंचार ही विचारधाराओं और तथ्यों के विनिमय का विस्तृत क्षेत्र है।

जन-संचार माध्यमों का महत्त्व (Importance of Mass Media)

जनसंचार के माध्मयों का महत्त्व निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है-

(1) स्थायी अधिगम (Permanent Learning):— जन संचार माध्यम के द्वारा स्थायी अधिगम होता है क्योंकि जितना अधिक ज्ञानेन्द्रियों का उपयोग होगा अधिगम उतना ही अधिक स्थायी होगा। छात्र जन-संचार माध्यम द्वारा सीखी गयी विषय-वस्तु को लम्बे समय तक याद रखते हैं।

(2) स्थान एवं समय से परे (Away from Place and Time ):— जन संचार माध्यम द्वारा किसी घटना का प्रसारण किसी भी स्थान व किसी भी समय किया जा सकता है। उसमें समय व सीमा का बन्धन नहीं है। इस प्रकार व्यक्ति अपनी सुविधानुसार इनका लाभ उठा सकता है।

(3) विशाल समूहों में सम्प्रेषण (Communication in Large Groups ):— भारत जैसे अधिक जनसंख्या वाले विकासशील देश में जन-संचार माध्यमों का शिक्षा में विशेष महत्त्व है। संचार माध्यमों द्वारा एक साथ लाखों लोगों में आसानी से प्रसारण किया जाता है। इसके द्वारा धन, समय एवं शक्ति की बचत भी होती है।

(4) जीवन की जटिलताओं का निराकरण (Solution of Complex Problems of Life):- जन-संचार माध्यमों ने दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जो शिक्षा ग्रहण करने में रुचि रखते हैं, शिक्षा प्राप्त करने के अवसर प्रदान किये हैं तथा रोजगार के साथ-साथ भी शिक्षा ग्रहण करना आसान बना दिया है।

(5) राष्ट्रीयता की भावना का विकास (Development of Nationalism ):- जन-संचार माध्यम ऐसे सशक्त माध्यम हैं जो राष्ट्रीयता की भावना का विकास करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम अपनी भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का प्रसारण सम्पूर्ण राष्ट्र में कर सकते हैं। अतः ये वे माध्यम हैं जिनके द्वारा राष्ट्रीयता का विकास आसानी से किया जा सकता है।

(6) औपचारिक शिक्षा (Formal Education):— औपचारिक शिक्षा के क्षेत्र में जन-संचार माध्यम वरदान सिद्ध हो रहे हैं। उदाहरणार्थ दूरदर्शन पर प्रसारित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की उच्च शिक्षा कार्यक्रम हमें औपचारिक रूप से शिक्षा प्रदान करता है। इस दृष्टि से एड्सैट (Edusat) का अपना अलग ही स्थान है।

(7) दुर्गम स्थानों पर शिक्षा (Education at Distant Places ):— जन-संचार माध्यमों के द्वारा दूरवर्ती, भयावह और दुर्गम स्थानों में भी शिक्षा आसानी से प्रदान कर सकते हैं। संसार के किसी भी भाग में घटित होने वाली घटनाओं को भी ग्रहण करने के ये प्रभावशाली साधन हैं। सुदूर स्थानों पर बैठे व्यक्ति आसानी से शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं।

(8) जन शिक्षा (Mass Education ):— जन-संचार साधनों का उद्देश्य लोगों में जाति, रंग, धर्म के भेदभाव के बिना शिक्षा प्रदान करना है। इस दृष्टि से जन-संचार माध्यम जन शिक्षा का प्रसार करने में अद्वितीय भूमिका निभा रहे हैं। यही कारण है कि आज देश में निरक्षर लोगों की संख्या दिन-प्रतिदिन तेजी से कम होती जा रही है।

जनसंचार साधनों के उद्देश्य (Objectives of Mass Media)

1. सूचनात्मक उद्देश्य:- जनसंचार साधन का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य नये परिवर्तनों, आविष्कारो खोज, अनुसन्धान, राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय नीतियों, सफलताओं और अन्य समाचारों के विषय में नवीनता और सामयिक सूचना प्रदान करना है। जनसंचार साधनका विज्ञान, तकनीक, सर्जरी, औषधि, उद्योग और कृषि के क्षेत्र में नवीनतम जानकारी प्राप्त की जा सकती है। प्रसिद्ध टेलीफीचर वर्ल्ड दिस वीक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। ज्योग्राफीकल चैनल और डिस्कवरी चैनल बहुत रोचक जानकारी देते हैं।

2. प्रभावशाली उद्देश्य:- जनसंचार साधन का दूसरा आधारभूत उद्देश्य लोगों के दिल और दिमाग को प्रभावित करना है। रेडियो, टेलीविजन, फिल्में और अखबार आदि बहुत संख्या ने लोगों के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और जीवन के नैतिक मूल्यों को प्रभावित करते हैं। रेडियो, टेलीविजन, फिल्में और अखवार लोगों की नब्ज पर हाथ रखे हुए हैं तथा उनको मनोवृत्तियो, विश्वासों, भावनाओं और विचारों को प्रभावित करते हैं।

3. मनोरंजनात्मक उद्देश्य:- जनसंचार साधन विशेषतया टेलीविजन, फिल्में, रेडियो, समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ इत्यादि का मनोरंजनात्मक महत्त्व है। रेडियो वार्ता, वाद-विवाद, नाटक, लेख मालाएँ, संगीत, टेली- नाटक, टेली फिल्में, गाने, चुटकुले, कहानियाँ, खेल आदि मनोरंजन के अच्छे साधन है। रेडियो और दूरदर्शन पर कार्यक्रम, समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ राष्ट्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं को चित्रित करते हैं और प्रत्येक प्रकार के लोगों-बच्चों, किशोरों, बालिगों मनुष्यों और स्त्रियों की विभिन्न अभिरुचियों और मनोरंजन का प्रबन्ध करते हैं। विशेषतया विद्यार्थी खेलकूद, कहानियों, नाटको, फिल्मो, यात्राओं के विवरण, संगीत आदि मनोरंजन की विशेष क्रियाओं से लाभान्वित होते है।

4. व्यापारिक उद्देश्य:– रेडियो, टेलीविजन, समाचार-पत्र और पत्रिकाएं जैसे जनसंचार साधनों का महत्त्वपूर्ण उद्देश्य विज्ञापनों द्वारा औद्योगिक, उपभोक्ता, मनोरंजनात्मक और घरेलू वस्तुओं के लिए आकर्षक ब्याज उपलब्ध करवाना है। संचार साधन वस्तुओं के लिए क्षेत्रीय, राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय बाजार खोजने का महत्त्वपूर्ण और लाभदायक साधन हैं। इसीलिए यह राष्ट्र के लिए विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी सहायक है।

5. राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय बोध को प्रोत्साहन:— जनसंचार साधनों का प्रयोग विद्यार्थियों और लोगों में परस्पर राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय बोध को प्रोत्साहित करने के लिए भी किया जाता है। उन्हें इससे पता चलता है कि देश और संसार किस प्रकार उन्नति कर रहे हैं और हम अन्तर्राष्ट्रीयता से कैसे जुड़े हुए हैं। एक देश में घटित होने वाली घटनाएँ संसार के दूसरे देशो को कैसे प्रभावित करती है। यदि तीसरा विश्वयुद्ध छिड़ जाए, तो हमे कितने कष्ट उठाने पड़ेगे। जनसंचार साधनों के कारण ही संसार एक इकाई बन गया है। ई-मेल और इण्टरनेट जैसी सुविधाओं के प्रचलन से समस्त संसार ने एक परिवार का रूप ले लिया है।

6. जन शिक्षा:- जनसंचार साधनों का उद्देश्य लोगों को सभी क्षेत्रों ने जाति, रंग, धर्म के भेदभाव के बिना शिक्षा प्रदान करना है।

7. निरन्तर शिक्षा:- जनसंचार साधनों का एक और उद्देश्य सेवारत अध्यापको, व्यवसायियों नौकरी-पेशा लोगों के व्यावसायिक विकास के लिए निरन्तर शिक्षा प्रदान करना है।

8. अनौपचारिक शिक्षा:- अनौपचारिक शिक्षा प्रदान करना जनसंचार साधनों का एक और परिचित महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उदाहरणस्वरूप टेलीविजन पर प्रसारित यूनिवर्सिटी ग्राण्ट्स कमोशन का उच्च शिक्षा कार्यक्रम हमें अनौपचारिक रूप से शिक्षा प्रदान करता है।

9. दुर्गम स्थानों पर शिक्षा:- जनसंचार साधनों ने अन्तरिक्ष पर विजय प्राप्त कर ली है। ये दूरवर्ती, भयानक और दुर्गम स्थानों में भी शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। ये उन घटनाओं को भी जो संसार के किसी भी भाग में चंटित हो, ग्रहण करने का प्रभावशाली साधन है। इस प्रकार ये घटनाओं की रिपोर्टिंग करने का भी विस्तृत संचार साधन है।

10. समय की बचत और किफायती:- जनसंचार साधन शिक्षा प्रदान करने के लिए समय की बचत करने वाले और किफायती हैं। इन्होंने समय पर विजय प्राप्त कर ली है। ये शिक्षा के प्रसार का तीव्र साधन है।

जनसंचार माध्यम के प्रकार (Types of Mass Media)

जनसंचार साधनों के शैक्षिक उपयोग में कठोर साधनों तथा कोमल साधनों का प्रयोग होता है-

1. कठोर साधन:- कठोर साधन वह है, जिनके माध्यम से कठोर सामग्री का शिक्षा या सम्प्रेषण में उपयोग किया जाता है। उदाहरणार्थ- दूरदर्शन, विभिन्न प्रकार के प्रोजेक्टर, छपाई की मशीन, कैमरे, चाक बोर्ड, बुलेटिन बोर्ड आदि।

2. कोमल साधन:– कोमल साधन वह सामग्री है, जिसे यन्त्रीकृत साधनों द्वारा सम्प्रेषण के लिए प्रयोग में लाया जाता है; जैसे-टेप स्लाइड, फिल्म बुलेटिन बोर्ड पर प्रदर्शित सामग्री, दूरदर्शन आदि।

कठोर अथवा यन्त्रीकृत साधनों तथा कोमल या यन्त्रेत्तर साधनों का उपरिलिखित विस्तृत वर्गीकरण है। संकुचित अर्थ में इन दोनों में अन्तर करना कठिन है, क्योंकि कुछ शिक्षा फिल्म, स्लाइड, छपी सामग्री को भी यन्त्रीकृत साधन कह सकते हैं।

जनसंचार माध्यय की सीमाएँ

जनसंचार माध्यम की प्रमुख सीमाएं इस प्रकार हैं-

  1. ये सम्प्रेषण का केवल एक ही रास्ता खोलते हैं। इसका अर्थ यह है कि जनता निष्क्रिय रहती है। वह इसमें सक्रिय भूमिका नहीं निभाती।
  2. ये आम जनता को केवल सुधार एवं दिशा निर्देश प्रदान कर सकते हैं, उन्हें इनमें भाग लेने के लिये बाध्य नहीं कर सकते।
  3. इन स्रोतों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा की ऐसी नीतियाँ बनायी जानी चाहियें जिससे प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण तथा प्रौढ़ शिक्षा की समस्या को हल करने में मदद मिल सके।
  4. संचार माध्यमों की व्यवस्था (Media Aringement) तीन प्रकार की हो सकती है-
    • अनायास (Random Arrangement):– चीजों को किसी विशेष क्रम में नहीं रखा जाता।
    • रेखीय (Linear Arrangement ):— शिक्षक अपनी सुविधा से जिसे चाहे प्रयोग में ला सकता है।
    • गत्यात्मक (Dynamic Arrangement):– इसके अन्तर्गत शिक्षक चीजों को इस प्रकार से व्यवस्थित करता है कि छात्र, मीडिया तथा शिक्षक स्वयं भी एक-दूसरे से मिल-जुलकर कार्य करते हैं और इस सबका परिणाम अधिगम में बढ़ोतरी से होता है।

जनसंचार तकनीकी के मुख्य क्षेत्र (Scope of Mass Communication Technology)

भारत में जनसंचार तकनीकी के मुख्य क्षेत्र निम्न प्रकार हैं-

  1. जनसंख्या शिक्षा।
  2. पोषक शिक्षा (Nutrition)।
  3. कृषि शिक्षा।
  4. बीमारियों, भ्रान्तियों आदि से मुक्ति।
  5. राजनीतिक चेतना।
  6. वातावरणीय चेतना आदि।

बहुत वर्षो पहले मार्शल मेक्लूहन (Marshall McLuhan) ने अपनी पुस्तक 'Understanding Media' के माध्यम से एक नारा दिया था— 'the medium is the message' जिसका तात्पर्य यह है कि संदेश की विषयवस्तु (मसौदा) उतना महत्व नहीं रखती जितना कि उसे ग्रहण करने का तरीका। मेक्लूहन ने तक दिया कि यह रेडियो ही था जिसने हिटलर को इतनी शक्ति प्रदान की कि वह चीजों को नियन्त्रण में से सका।

जनसंचार के माध्यम (Mass Media)

मास मीडिया या जन संचार माध्यम ऐसे माध्यम हैं जिनके द्वारा, जनता तक समाचार सूचना का सम्प्रेषण टी.वी. रेडियो और प्रेस से होता है। जनसंचार का शब्द आते ही हमारे मस्तिष्क में कुछ परिष्कृत उपकरणों और विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संयंत्रों का बोध होने लगता है। प्राचीन काल में जब इन उपकरणों का आविष्कार नहीं हुआ था तब धार्मिक प्रवचन, कथा, कविता, नाटक, नौटंगी, गीत-संगीत, चौपाल आदि के माध्यम से संचार का काम लिया जाता था। आदि काल से चले आ रहे जनसंचार के इन माध्यमों की प्रासंगिकता अब भी बनी हुई है। जनसंचार के लिए माध्यम का होना अनिवार्य है। वर्तमान में प्रचलित जनसंचार माध्यमों को हम तीन श्रेणी में बाँट सकते हैं-

  1. पारम्परिक माध्यम
  2. मुद्रित माध्यम
  3. इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण

1. पारम्परिक माध्यम (Traditional Medium):- जनसंचार के पारम्परिक माध्यमो का उद्धर आदिकाल में ही हो चुका था। जब मनुष्य जनसंचार का तात्पर्य भी नहीं जानता था तभी से ये माध्यम अस्लि में है। सभ्यता के शिवास से लेकर मुद्रण यंत्र के आविष्कार होने तक माध्यम हो संदेश सम्प्रेषित करते थे जनसंचार का यह सर्वाधिक प्रभावी माध्यम है। इस माध्यम के द्वारा सन्देश साक्षर एवं निरक्षर दोनों समूहों में प्रभावी ढंग से सम्प्रेषित होते है। इसके अंतर्गत धार्मिक प्रवचन, कथा, वार्ता, यात्रा, वृत्तांत, पर्यटन, गीत-संगीत, लोक संगीत, नाटक, लोकनाटय आदि शाते हैं। इन माध्यमों की यह प्रमुख विशेषता है कि मनुष्यों द्वारा उस समूह की भाषा, संस्कृति एवं रुचि के अनुसार संदेशों का सम्प्रेषण किया जाता है जिस समूह में संदेश प्रसारित करना होता है। जनसंचार के पारम्परिक माध्यम आदिकाल से ही अस्तित्व में हैं। अपने उदयकाल से लेकर आज तक ये संदेश सम्प्रेषण में प्रभावी एवं सशक्त भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं और भविष्य में भी ये भारत जैसे विकासशील देश के लिए प्रभावी जनसंचार माध्यम के रूप में स्थापित होंगे।

2. मुद्रित माध्यम (Print Medium):– मुद्रण यंत्र के आविष्कार और मुद्रण कला के विकास से जनसंचार के क्षेत्र में क्रान्ति आई। उपाई के आविष्कार से पूर्व हस्तलिखित पत्रों एवं पुस्तकों का प्रचलन था जो जनसाधारण की पहुँच से बाहर था। ज्ञान और जानकारी का आदान-प्रदान और प्रचार-प्रसार समाज में बहुत सीमित था। मुद्रणालय के आविष्कार से पुस्तकों, समाचार-पत्रों और अन्य पाठ्य सामग्रियों का प्रकाशन इतना बढ़ गया कि जन साधारण के लिए ज्ञान और पथ-प्रदर्शन प्राप्त करना सुलभ हो गया। आज के शिक्षित जनमानस में संचार का यह एक सशक्त माध्यम बन चुका है। इसके अन्तर्गत दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक पार्शिक आदिकालीन और अनियतकालीन समाचार पत्र-पत्रिकाएँ आते हैं। इसके अतिरिक्त पुस्तकें, धार्मिक ग्रंथ पोस्टर, बैनर, पम्फलेट एवं अन्य मुद्रित सामग्री जो किसी भी प्रकार की सूचना एवं शान से सम्बद्ध हो, भी मुद्रित माध्यम के रूप में प्रचलित है। मुद्रण तकनीक के अंतर्गत निरन्तर हो रहे विकास ने अब मुद्रित माध्यमों को और भी प्रभावी बना दिया है।

3. इलेक्ट्रानिक प्रसारण (Electronic Broadcasting):- जनसंचार के क्षेत्र में नई क्रान्ति टेलीग्राफ के आविष्कार के साथ आई। टेलीग्राफ के माध्यम से दूर-दराज के क्षेत्रों में सन्देश प्रेषण को गति मिली। टेलीग्राफ के पश्चात् टेलीफोन के आविष्कार से संचार व्यवस्था में और तेजी आई। इसके पश्चात रेडियो, वायरलेस ट्रान्जिस्टर टेपरिकार्डर, टेलीविजन, वीडियो कैसेट रिकॉर्डर, कम्प्यूटर मोडम और चलचित्रों के आविष्कार से संचार व्यवस्था में एक नई क्रान्ति आई। इसके पश्चात् अन्तरिक्ष में कृत्रिम उपग्रहों को प्रक्षेपित करके जनसंचार की नई तकनीक का विकास किया गया। ये सभी इलेक्ट्रानिक जनसंचार माध्यम आज कल व्यस्तता भरे वैज्ञानिक युग में संचार के सर्वाधिक शक्तिशाली और प्रभावी माध्यम है। शिक्षा, मनोरंजन और सूचना के प्रचार-प्रसार में ये इलेक्ट्रानिक माध्यम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान विश्व में जहाँ भूमण्डलीकरण की भावना का प्रचार किया जा रहा है। वहीं इस भावना को मूर्त रूप देने का काम ये आधुनिक इलेक्ट्रानिक दृश्य-श्रव्य माध्यम ही करते है।

जनसंचार के उपर्युक्त तीनों माध्यम मानव सभ्यता के क्रमिक विकास का भी परिचय देते हैं। तीनों माध्यमों की अपनी अलग-अलग उपयोगिता है। संचार क्रान्ति के इस वर्तमान युग में भी अपने अस्तित्व को बनाए रखने में पारम्परिक माध्यम पूर्णतया सक्षम है। शिक्षित जनमानस में मुद्रित माध्यमों की लोकप्रियता सर्वविदित है। इलेक्ट्रानिक माध्यमों की प्रसार सीमा सुनिश्चित होती है। अपने प्रसार क्षेत्र में ये भी लोकप्रिय संचार माध्यम है। तीसरी दुनिया समेत भारत में भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां जनसंचार माध्यम तो दूर, सभ्यता की एक किरण भी नहीं पहुँच सकी है। यहां पर सार्थक सन्देश सम्प्रेषण पारम्परिक माध्यमों द्वारा ही सम्भव है। ये माध्यम अपने द्वारा प्रसारित सन्देशों का व्यापक प्रभाव जनमानस पर छोड़ते हैं।

किसी समाचार, सूचना, मत, विचार एवं कथन को जन-जन तक सम्प्रेषित करने का साधन ही मीडिया है। टीवी, रेडियो तथा मुद्रित माध्यमों से सूचनाओं का सम्प्रेषण ही नहीं होता अपितु उनके द्वारा प्रभावित भी किया जाता है। यह प्रभावकारी माध्यम ही मीडिया है। मीडिया सूचना पहुंचाने वाला, शिक्षित, करने वाला, मनोरंजन करने वाला ऐसा संस्थान है जिसके द्वारा समाज और राष्ट्र का नव निर्माण सम्भव है।

जनसंचार माध्यमों में केन्द्र सरकार की भूमिका (Role of Central Government in Mass Media)

जनसंचार माध्यमों में केन्द्र सरकार की भूमिका इस प्रकार है-

  1. जनसंचार के विभिन्न साधनो; जैसे-टेलीविजन, फिल्मे, रेडियो, समाचार-पत्रों के विकास के लिए काफी कार्य करती है और ये साधन जनता का मनोरंजन करते हैं।
  2. संचार साधन राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाने में काफी सहयोग देते हैं।
  3. संचार साधनों द्वारा राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय जागरूकता उत्पन्न होती है।
  4. संचार साधनों द्वारा केन्द्र सरकार विभिन्न सूचनाएँ, जानकारियाँ जनता तक पहुंचाती है।
  5. संचार साधनों द्वारा केन्द्रीय कार्यक्रमों की शिक्षा; जैसे-आहार पोषण, व्यावसायिक शिक्षा, जनसंख्या शिक्षा, पर्यावरण शिक्षा आदि जनता को दी जाती है।

संचार एवं जनसंचार में अन्तर

S.N. संचार जनसंचार
1. संचार व्यक्तिगत है। जनसंचार सामूहिक है।
2. संचार में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को सूचना प्रदान करता है। जनसंचार में एक व्यक्ति सम्पूर्ण समाज, समुदाय, देश की जनसंख्या को सन्देश देता है।
3. संचार का उदाहरण जैसे एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से टेलीफोन पर बात करता है। सजनसंचार का उदाहरण जैसे कोई एक व्यक्ति भाषण देता है और उसका लाभ हजारों लोग लेते हैं।

संचार माध्यमों के दुष्प्रभाव (Side Effects of Media)

आधुनिकीकरण का बढ़ता प्रभाव, पाश्चात्य सभ्यता का प्रसार, संचार के साधनों का दुरुपयोग हमारे देश के नागरिक को न केवल अपराध की ओर अग्रसर कर रहा 6/6 वरन् हम अनेक बीमारियों; जैसे मोटापा, डायबिटीज, डिप्रेशन, आँखों में कमी, थकान, नींद न आना, कभी-कभी हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज जैसी बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं। संचार माध्यमों के कुछ मुख्य दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं—

  1. आज हमारे देश का युवा वर्ग जो देश का भावी कर्णधार, भविष्य है, वह मोबाइल फोन में समाता जा रहा है। सुबह उठने से रात सोने तक शायद ही कोई पल हो, जिसमें वह स्वयं का करता हो। इनके द्वारा ही युवा आये दिन दुर्घटनाओं, बीमारियों आदि का शिकार होते जा रहे हैं।
  2. टी०वी० सीरियल, फिल्मों के बढ़ते प्रभाव के कारण आज हम अपनी संस्कृति-सभ्यता को भूल पाश्चात्यता की ओर बढ़ रहे हैं, जिस कारण हम अनेक घटनाओं, अन्य विनाशकारी प्रवृत्तियों की ओर अग्रसर होते जा रहे हैं। अपने जीवन को और अधिक कठिन परिस्थितियों में डाल रहे हैं।
  3. वर्तमान में समाज के प्रत्येक क्षेत्र को अधिक शक्ति और नवीनता के साथ प्रगति की ओर ले जाकर उसका आधुनिकीकरण करने की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में इण्टरनेट के बढ़ते प्रभाव से साइबर क्राइम का क्षेत्र भी दोगुनी रफ्तार से गति कर रहा है।
  4. इण्टरनेट, मोबाइल के दुरुपयोग के कारण किसी भी क्षेत्र की पूरी लोकेशन की जानकारी आसानी से प्राप्त हो जाती है। इसी विषय का लाभ उठाकर विभिन्न आतंकवादी संगठन विश्व के भीड़भाड़ वाले इलाकों में आये दिन दुर्घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं और अपने स्वतंत्र अस्तित्व की घोषणा करते हैं।

संचार माध्यम के साधनों ने एक ओर मानव के ज्ञान को बढ़ाया हैं, वहीं दूसरी ओर अश्लीलता का ऐसा जाल फैलाया है कि कोई भी क्षेत्र इससे अनछुआ नजर नहीं आता है। मोबाइल से फोटो लेकर वीडियो क्लीपिंग के द्वारा अश्लील फिल्में बनाना, एस०एम०एस० भेजना आदि के द्वारा अश्लीलता का प्रचार हो रहा है। ऐसी फिल्में मानव मस्तिष्क पर बुरा असर डालती है।

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