शिक्षा में कम्प्यूटर की भूमिका | Role of Computer in Education in hindi

कम्प्यूटर एक अंग्रेजी शब्द है जो लैटिन भाषा के शब्द Computare से बना है जिसका अर्थ होता है गणना करना। अत: कम्प्यूटर गणना करने वाली एक ऐसी मशीन है

कम्प्यूटर क्या है?

कम्प्यूटर एक अंग्रेजी शब्द है जो लैटिन भाषा के शब्द Computare से बना है जिसका अर्थ होता है गणना करना। अत: कम्प्यूटर गणना करने वाली एक ऐसी मशीन है जो हमारे द्वारा उपलब्ध करवाए हुए आंकड़ों को संग्रहित करके गणना करता है और परिणाम को प्रदर्शित करता है। कम्प्यूटर को इलेक्ट्रॉनिक मस्तिष्क कहा जाता है।

Role of Computer in Education

वर्तमान में कम्प्यूटर को विज्ञान और तकनीकी द्वारा मानव जाति को दिया जाने वाला सबसे अमूल्य उपहार कहा जाता है। इसने हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों में एक अद्भुत चमत्कार ला दिया है। कम्प्यूटर मानव के रोजमर्रा जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। कम्प्यूटर शिक्षा का अच्छा स्रोत है। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका प्रयोग वास्तविक शिक्षण कार्यों के अतिरिक्त शिक्षा के और अन्य सभी स क्रिया-कलापों के उचित व्यवस्थापन और प्रबन्ध हेतु जोर-शोर से किया जा रहा है।

ए०एस० हानंबार्ड के शब्दों में, "कम्प्यूटर ऐसा विद्युतचालित उपकरण है जो डिस्क या चुम्बकीय टेप पर सूचना संकलित करता है।"

साधारण शब्दों में हम कह सकते हैं कि कम्प्यूटर ऐसी यान्त्रिक विधि है जो अत्यधिक सूचनाओं का संकलन करती है और बहुत ही कम समय में उनकी विशिष्ट रूप से व्यवस्था करके आवश्यकतानुसार उसका प्रस्तुतीकरण करती है।

शिक्षा में कम्प्यूटर की भूमिका

शिक्षा में कम्प्यूटर का प्रयोग अभी आरम्भिक अवस्था में है फिर भी इसी के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कई चमत्कारपूर्ण परिवर्तन हो रहे हैं। कम्प्यूटर निम्नलिखित क्षेत्रों में अध्यापकों को सहायता प्रदान कर रहे हैं-

1. विद्यार्थियों का वर्गीकरण:- कम्प्यूटर योग्यताओं के अनुसार विद्यार्थियों के वर्गीकरण तथा उनका कार्य क्षमता के मूल्यांकन में सहायता प्रदान करते हैं।

2. समय तालिका की तैयारी:- कम्प्यूटर समय तालिका की तैयारी में सहायता प्रदान करते हैं।

3. अधिगम संसाधनों को नियत करना:- कम्प्यूटर व्यक्ति की आवश्यकताओं एवं रुचियों के अनुसार उसके लिए अधिगम संसाधनों एवं सामग्री का निश्चय करता है।

4. प्रगति पत्र की व्यवस्था:— कम्प्यूटर प्रगति पत्रों की व्यवस्था करता है और उन्हें कुशलतापूर्वक एवं गोपनीयता से सुरक्षित रखता है।

5. आसान पहुँच:- कम्प्यूटर द्वारा विपुल सूचनाओं में से निर्देशन एवं सन्दर्भ के लिए वांछित सूचना प्राप्त करना आसान होता है।

6. प्रत्यक्ष अन्तक्रिया:- कम्प्यूटर विद्यार्थी और विषय-वस्तु की प्रत्यक्ष अन्तक्रिया प्रस्तुत करता है।

7. ट्यूटोरियल एवं संवाद:- यह अध्यापक की ट्यूटोरियल कार्य में विद्यार्थियों को व्यस्त रखने में सहायता प्रदान करता है। यह ट्यूटोरियल अन्तर्क्रिया एवं संवाद की कुशलतापूर्वक व्यवस्था करता है।

8. तात्कालिक पृष्ठ पोषण:- उत्तम अन्तर्क्रिया तथा अभिप्रेरणा के लिए कम्प्यूटर अध्यापक को तात्कालिक पृष्ठ पोषण प्रस्तुत करने में सहायता प्रदान करता है।

9. समस्या समाधान एवं रचनात्मकता:- विद्यार्थियों में समस्या समाधान एवं रचनात्मक योग्यताओं के विकास के लिए कम्प्यूटर का प्रयोग किया जा सकता है।

10. प्रयोगात्मक कार्य:- कम्प्यूटर प्रयोगात्मक कार्य (विशेषकर विज्ञान विषय से सम्बन्धित) में पूरक सहायता प्रदान कर सकता है।

11. पुनरावृत्ति:- यदि विद्यार्थियों को कोई पाठ समझ न आया हो तो उसकी कम्प्यूटर पर कई बार पुनरावृत्ति की जा सकती है। कम्प्यूटर विद्यार्थियो को गति एवं कार्यक्षमता के अनुसार काम कर सकता है।

12. निर्देशन:– निर्देशन एवं सन्दर्भ के लिए आवश्यक सूचना प्रदान करने में कम्प्यूटर अध्यापक की सहायता कर सकता है।

कम्प्यूटर एक आदर्श अध्यापक के रूप में काम कर सकता है। यह धैर्य कायम रखते हुए ज्ञान प्रदान कर सकता है। यह मनोरंजन एवं श्रव्य दृश्य साधन भी प्रदान करता है।

कम्प्यूटर की विशेषतायें

कम्प्यूटर की प्रमुख विशेषतायें निम्नलिखित हैं-

1. गति:- कम्प्यूटर इतनी तीव्रगति से कार्य करता है, जितना तीव्र गति से कल्पना की जाती है। इससे अपनी गति के कारण ही अनेक वैज्ञानिक प्रोजेक्टों को सम्भव बनाया। कम्प्यूटर के द्वारा अनेको अद्भुत कार्य किये जा चुके हैं और किये जा रहे हैं। कम्प्यूटर के इलेक्ट्रॉनिक होने के कारण इसमें इतनी तीव्र गति है कि यह तत्क्षण बन जाता है।

2. भण्डारण:- कम्प्यूटर तीव्र गति के साथ-साथ बड़ी मात्रा में सूचनाओं का भण्डारण भी का सकता है। इसकी इस विशेषता के कारण हम काफी आगे भी बढ़े हैं। मनुष्य ज्ञान के विस्फोट का मुकाबल नहीं कर सकता है किन्तु कम्प्यूटर अपनी इस विशेषता के कारण कर सकता है। इस सम्बन्ध में यह कहन गलत होगा कि कम्प्यूटर ने चराओं के विस्फोट को लिया है।

3. परिशुद्धि:- कम्प्यूटर एक मशीन है अतः इसके द्वारा भी गणना में त्रुटि होने की सम्भावना रहती है किन्तु जैसे-जैसे ज्ञान करने की तकनीक का विकास बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसकी परिशुद्धता में वृद्धि होती जा रही है।

4. सत्यता:- कम्प्यूटर द्वारा निकाले गये परिणाम पूर्णतः सत्य होते हैं अर्थात् यह अपने आप कोई गलती नहीं करता है। यह गलती तभी करता है जबकि इसे निर्देश गलत दिये जाते हैं, अतः इससे सही निष्कर्ष प्राप्त करने के लिए इसे सही निर्देश देना अत्यन्त आवश्यक है।

5. लचीलापन:- कम्प्यूटर में लोचता का गुण भी विद्यमान होता है, क्योंकि इसका प्रयोग व्यवसाय, आफिसों मनोरंजन कार्यों एवं घरेलू कार्यों में किया जा सकता है अर्थात् यह कहा जा सकता है कि यह प्रत्येक में उपयोगी है।

6. बहुविज्ञता यदि कार्य को पूर्णतः- क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित कर दिया जाये तो यह किसी भी प्रकार कार्य कर सकता है। सामान्यतः यह निम्नलिखित कार्य करता है-

  • (a) यह गणितीय एवं तुलनात्मक कार्य करता है।
  • (b) यह बाहरी दुनिया से सूचनाओं का आदान-प्रदान अदा-प्रदा, इकाइयों द्वारा कर करता है।
  • (c) यह केन्द्रीय परिकलन इकाई के माध्यम से आंकड़ों को भीतर ही भीतर स्थानान्तरित करता है।

7. स्वचालन:— कम्प्यूटर एक स्वचालित यन्त्र है। इस स्मृति में प्रोग्राम भर देने के पश्चात् उसे व्यक्तिगत आदेश दिया जाता है तब नियन्त्रण इकाई अपना कार्य करती है। एक बार आदेशानुसार कार्य प्रारम्भ होने के पश्चात् प्रोग्राम के अन्त में यह स्वयं ही अपना कार्य समाप्त कर लेता है।

कम्प्यूटर का वर्गीकरण

कम्प्यूटर का वर्गीकरण निम्न प्रकार किया गया है-

1. सुपर कम्प्यूटर:- यह वैज्ञानिक क्षेत्र में काम आने वाला सबसे अधिक शक्तिशाली व कीमती कम्प्यूटर है।

2. मेनफ्रेम कम्प्यूटर:- यह कम्प्यूटरों का सबसे शक्तिशाली कम्प्यूटर है। यह नेटवर्क पर कार्य करते हैं।

3. मिनी कम्प्यूटर:– इस कम्प्यूटर की कार्य प्रणाली तो मेनफ्रेम की भाँति ही होती है किन्तु ये उनकी ततशाली नहीं होते हैं।

4. माइक्रो कम्प्यूटर:— वर्तमान समय में इन कम्प्यूटर का प्रचलन अत्यधिक है क्योंकि इनकी गति काफी तीव्र एवं कीमत काफी कम होती है।

5. पर्सनल कम्प्यूटर:- पर्सनल कम्प्यूटर माइक्रो कम्प्यूटर ही है। इनकी भी कीमत काफी कम है, जिसके कारण ये काफी प्रचलित है।

कम्प्यूटर के लाभ

कम्प्यूटर के आविष्कार ने मानव के आधुनिक जीवन में क्रान्ति ला दी है। इसने मानव जीवन के प्रायः हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। यह तीव्र गणना एवं विशाल भण्डारण करने वाले एक मस्तिष्क के रूप में कार्य करता है। इसलिए आज कम्प्यूटर का हर क्षेत्र में उपयोग हो रहा है। इसके उपयोग से मानव को नीचे लिखे लाभ प्राप्त हो रहे हैं-

1. तीव्र गति:- कम्प्यूटर के कार्य करने की गति अत्यन्त तीव्र है। वह बड़ी से बड़ी तथा जटिल से जटिल गणनायें कुछ ही क्षणों में कर देता है तथा विश्व में उपलब्ध सूचनाएँ अल्प समय में ही हमें उपलब्ध करा देता है। इससे हमारे समय व श्रम दोनों की ही बचत होती है। कम्प्यूटर के काम करने की गति इतनी तीव्र होती है कि उसे हम सामान्य घड़ी से नहीं नाप सकते हैं। इससे हमारे समय व श्रम को बचत होती हैं।

2. शुद्धता:– यदि कम्प्यूटर ऑपरेटर ठीक से काम करता है तथा कम्प्यूटर भो क्षतिग्रस्त नहीं हैं तो कम्प्यूटर गणना करके जो सूचनाएँ देता है उनमें शत-प्रतिशत शुद्धता होती है। उनमें त्रुटि होने की कोई सम्भावना नहीं होती है।

3. विश्वसनीयता:— कम्प्यूटर द्वारा किये गये कार्यों, गणनाओं तथा दी गई सूचनाओं में शुद्धता अति उच्च होती है इसलिए इनमें विश्वसनीयता भी अधिक होती है। हम बिना झिझक के कम्प्यूटर द्वारा प्रदन सूचनाओं पर विश्वास कर लेते हैं।

4. विशाल भण्डारण क्षमता:- कम्प्यूटर में विभिन्न सूचनाओं का भण्डारण करने की क्षमता अद्भुत होती है। कम्प्यूटर विभिन्न आंकड़ो सूचनाओ. चित्रों आदि का भण्डारण विशाल मात्रा में कर सकता है। यह भण्डारण भी बड़ा व्यवस्थित, संगठित तथा वैज्ञानिक ढंग से होता है। फलतः जिस किसी आँकड़े सूचना आदि की आवश्यकता होती है उसे तुरन्त ही प्राप्त किया जा सकता है।

5. स्मृति:— कम्प्यूटर को अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति होती है। वह पुराने कार्य, कार्यक्रमों, निर्देशों, आंकड़ों, गणनाओं आदि को बखूबी अपनी स्मृति में रख सकता है और आवश्यकता पड़ने पर काम में ले सकता है।

6. विविधता:- कम्प्यूटर विविध कार्य कर सकता है। वह विभिन्न भाषाओं में तथा विभिन्न आकार के अक्षरों में टाइप कर सकता है, गणनाएँ कर सकता है, सारिणी बना सकता है, ग्राफ बना सकता है, चित्र तथा एनीमेशन कर सकता है, एकाउन्टिंग कर सकता है।

7. स्वचालकता:- कम्प्यूटर स्वचालित यन्त्र है। ऑपरेटर कम्प्यूटर को चालू करने के बाद जो भी निर्देश कम्प्यूटर को देता है, कम्प्यूटर स्वतः ही उन निर्देशों का पालन करते हुए, ऑपरेटर को वांछित परिणाम उपलब्ध करा देता है। ऑपरेटर को हर कदम पर निर्देश देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

कम्प्यूटर से हानियाँ

ऊपर हमने कम्प्यूटर के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगिता का अध्ययन किया। इससे स्पष्ट है कि जीवन के हर क्षेत्र में कम्प्यूटर किसी न किसी रूप में उपयोगी है। किन्तु इस प्रकार की उपयोगिता के होते हुए भी कम्प्यूटर से व्यक्ति तथा समाज को कुछ हानियाँ भी हुई हैं। इनमें से कुछ का उल्लेख नीचे किया जा रहा है-

1. अत्यधिक निर्भरता:- आज का मानव कम्प्यूटर पर सीमा से अधिक निर्भर हो गया है। यहाँ तक कि छोटी कक्षाओं के बालक भी सामान्य गुणा, बाकी, जोड़ के प्रश्न, पहाड़े आदि के लिए कैलकुलेटर पर निर्भर रहने लगे हैं। इसका उनकी क्षमताओं के विकास पर निश्चित ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी प्रकार मौसम वैज्ञानिक, ज्योतिषी, वैज्ञानिक आदि कम्प्यूटर पर सीमा से अधिक निर्भर हो गये हैं।

2. बेरोजगारी में वृद्धि:- कम्प्यूटर की कार्यक्षमता बहुत अधिक होती है। वह अल्प समय में ही अनेक व्यक्तियों का काम सहज ही कर देता है। इससे बड़ी मात्रा में बेरोजगारी में वृद्धि हुई है। कम्प्यूटर ने इंजीनियरिंग तथा इससे सम्बन्धित धन्धों ने जितने रोजगार उपलब्ध कराये हैं उससे कहीं गुना ज्यादा व्यक्ति बेरोजगार हुए हैं।

कम्प्यूटर सम्बन्धी समस्यायें

कम्प्यूटर सम्बन्धी समस्याएं निम्नलिखित है-

  1. कम्प्यूटर द्वारा अभी पाठशालाओं में शिक्षा प्रदान करना सम्भव नहीं है, क्योंकि इसके लिए समुचित स्थान का अभाव पाया जाता है।
  2. इसमें शिक्षक एक छात्र के मैत्रीपूर्ण एवं संवेगात्मक सम्बन्धों का अभाव पाया जाता है।
  3. अनुदेशन प्राप्त करते समय छात्र ऊब जाते है और कई बार तो इसे बीच में ही छोड़ देते हैं।
  4. छात्र जो कुछ सीखते हैं, कम्प्यूटर के द्वारा ही सीखते है। वे कम्प्यूटर के सामने यन्त्रवत् बैठे रहते है। अपने अगल बगल के मित्रों की और उनका ध्यान नहीं जाता है। परिणामस्वरूप उनमें मैत्री व सहयोग के भाव विकसित नहीं हो पाते हैं।
  5. इसके अन्तर्गत मौखिक अभ्यास के अवसर नहीं प्राप्त हो पाते हैं।
  6. इनका उपयोग कक्षा शिक्षण में भी उचित रूप से नहीं हो पाता है तथा इनके द्वारा व्यक्तिगत शिक्षा भी नहीं प्रदान की जा सकती है, क्योंकि कक्षा में आगे की एक दो पंक्ति में बैठे छात्र ही पर्दे पर प्रदर्शित पाठ देख पाते हैं।
  7. तकनीकी उपकरणों के प्रयोग के प्रति अध्यापक सदा से पूर्वाग्रह से ग्रस्त रहे हैं। अतः उन्हें सर्द इस बात का भय बना रहता है कि कहीं यह उनका स्थान न ले लें।
  8. यह विद्यार्थियों को भाषा सम्बन्धी दक्षता प्रदान करने में सक्षम नहीं है।
  9. कम्प्यूटर अनुदेशन प्रदान करने के लिए आज भी प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव बना हुआ है जिसके कारण इसका व्यापक प्रयोग हो पाना असम्भव है।

शैक्षिक कम्प्यूटर की सीमाएँ

शैक्षिक कम्प्यूटर की निम्नलिखित सीमाएं हैं-

  1. कम्प्यूटर, धनिक एवं कुछ माध्यम वर्ग तक ही सीमित है क्योंकि यह खर्चीला एवं महंग उपकरण है।
  2. अशिक्षा एवं बिजली अभाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कम्प्यूटर महत्त्वहीन हो जाता है।
  3. कम्प्यूटर व्यावसायिक, वैज्ञानिक एवं उद्यमी क्षेत्रों में अधिक सफल है अन्य क्षेत्रों की तुलना में।
  4. कम्प्यूटर माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों हेतु उतने उपयोगी नहीं सिद्ध हुए जितन कि विश्वविद्यालय के छात्रों हेतु।
  5. कक्षा शिक्षण में इनका उपयोग भली-भांति ढंग से नहीं हो पाता है। इसके माध्यम से व्यक्तिग शिक्षण भी नहीं दिया जा सकता है क्योंकि कक्षा की अग्रिम पंक्ति में बैठे कुछ ही छात्र स्क्रीन प प्रदर्शित किये जाने वाले पाठ को नहीं देख सकते हैं।
  6. समुचित स्थान के अभाव के कारण अभी विद्यालयों में इसके द्वारा शिक्षा देना कठिन कार्य है।
  7. छात्र जो भी अधिगम करते हैं वे संगणक द्वारा ही दिया जाता है। अतः कम्प्यूटर के सन्मुख यन्त्रवत ध्यान केन्द्रित करते हुए बैठते रहते हैं, उन्हें आस-पास के सहपाठियों से कोई मतलब नहीं होता इससे उनके मंत्री व सहयोग के भाव विकसित नहीं हो पाती।
  8. कम्प्यूटर के रख-रखाव में दिनभर सावधानी की आवश्यकता होती है।
  9. कम्प्यूटर से छात्रों के स्वतन्त्र चिन्तन और सृजनात्मक गुणों का विकास नहीं हो पाता।
  10. एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में कठिनाई।

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