शिक्षण सॉफ्ट स्किल्स | संचार, व्यावसायिकता, धैर्य, रचनात्मकता, उत्साह, आत्मविश्वास, समर्पण | Teaching Soft Skills in hindi

एक अच्छा 'शिक्षक-प्रशिक्षण' सदैव अपने प्रशिक्षार्थियों में विशिष्ट शिक्षण-कौशलों में निपुणता प्रदान करता है. अतः एक अध्यापक के लिए आवश्यक हो जाता है

शिक्षण सॉफ्ट स्किल्स (Teaching Soft Skills)

एक अच्छा 'शिक्षण-प्रशिक्षक' सदैव अपने प्रशिक्षार्थियों में विशिष्ट शिक्षण-कौशलों में निपुणता प्रदान करता है. अतः एक अध्यापक के लिए आवश्यक हो जाता है कि वह शिक्षण कौशलों का अर्थ समझे, उनकी धारणाओं से परिचित हो और उन पर पूर्ण अधिकार प्राप्त करने में समर्थ हो. तभी वह एक अच्छा, निपुण शिक्षक बन सकता है.

शिक्षण सॉफ्ट स्किल्स | संचार, व्यावसायिकता, धैर्य, रचनात्मकता, उत्साह, आत्मविश्वास, समर्पण |

अंग्रेजी से अनुवाद किया गया शब्द 'Soft Skills' जिसे सामान्य कौशल या मुख्य कौशल के नाम से भी जाना जाता है. यह वह स्किल्स है जिसे बिना एकेडमिक ज्ञान के प्राप्त किया जाता है. सॉफ्ट स्किल हमारी प्रोफेशनल लाइफ में काम आने वाले विशिष्ट कुशलता है. एकेडमिक डिग्री या तकनीकी अनुभव से परे यह कौशल सभी इंडस्ट्री और हर नौकरी के क्षेत्र में काम आती है. सॉफ्ट स्किल्स हर करियर के लिए उपयोगी है. सॉफ्ट स्किल्स एक व्यापक क्षेत्र है, जिसमें संप्रेषण, व्यवसायिकता, धैर्य, रचनात्मकता, उत्साह, आत्मविश्वास, समर्पण आदि स्किल्स शामिल हैं. इन सभी का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है-

I. सम्प्रेषण कौशल (Communication Skill)

संप्रेषण दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच मौखिक, लिखित, सांकेतिक या प्रतिकात्मक माध्यम से विचार एवं सूचनाओं के प्रेषण की प्रक्रिया है। संप्रेषण हेतु सन्देश का होना आवश्यक है। संप्रेषण में पहला पक्ष प्रेषक (सन्देश भेजने वाला) तथा दूसरा पक्ष ग्राही (सन्देश प्राप्तकर्ता) होता है। संप्रेषण उसी समय पूर्ण होता है जब सन्देश मिल जाता है और उसकी स्वीकृति या प्रत्युत्तर दिया जाता है।

संप्रेषण के प्रकार (types of communication)

संप्रेषण मौखिक, लिखित या गैर शाब्दिक हो सकता है-

1. मौखिक संप्रेषण (oral communication)

जब कोई संदेश मौखिक अर्थात मुख से बोलकर भेजा जाता है तो उसे मौखिक संप्रेषण कहते हैं। यह भाषण, मीटिंग, सामुहिक परिचर्चा, सम्मेलन, टेलीफोन पर बातचीत, रेडियो द्वारा संदेश भेजना आदि हो सकते हैं। यह संप्रेषण का प्रभावी एवं सस्ता तरीका है। यह आन्तरिक एवं बाह्य दोनों प्रकार के संप्रेषण के लिए सामान्य रूप से प्रयोग किया जाता है। मौखिक संप्रेषण की सबसे बड़ी कमी है कि इसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता क्योंकि इसका कोई प्रमाण नहीं होता।

2. लिखित संप्रेषण (written communication)

जब संदेश को लिखे गये शब्दों में भेजा जाता है, जैसे पत्र, टेलीग्राम, मेमो, नोटिस, रिपोर्ट आदि ताे इसे लिखित संप्रेषण कहते है। इसकी आवश्यकता पड़ने पर पुष्टि की जा सकती है। सामान्यत: लिखित संदेश भेजते समय व्यक्ति संदेश के सम्बन्ध में सावधान रहता है। यह औपचारिक होता है। इसमें अपनापन नहीं होता तथा गोपनीयता को बनाए रखना भी कठिन होता है।

3. गैर-शाब्दिक संप्रेषण (non-verbal communication)

ऐसा संप्रेषण जिसमें शब्दों का प्रयोग नहीं होता है गैर शाब्दिक संप्रेषण कहलाता है। जब आप कोई तस्वीर, ग्राफ, प्रतीक, आकृति इत्यादि देखते हैं तो आपको उनमें प्रदर्शित संदेश प्राप्त हो जाता है। यह सभी दृश्य संप्रेषण हैं। घन्टी, सीटी, बज़र, बिगुल ऐसे ही उपकरण हैं जिनके माध्यम से हम अपना संदेश भेज सकते हैं। इस प्रकार की आवाजें ‘श्रुति’ कहलाती है। इसी प्रकार से शारीरिक मुद्राओं जिसमें शरीर के विभिन्न अंगों का उपयोग किया गया हो, उनके द्वारा भी हम संप्रेषण करते हैं। इन्हें संकेतों द्वारा संप्रेषण कहते हैं। हम अपने राष्ट्रीय ध्वज को सलाम करते हैं। हाथ मिलाना, सिर को हिलाना, चेहरे पर क्रोध के भाव लाना, राष्ट्र गान के समय सावधान की अवस्था में रहना आदि संकेत के माध्यम से संप्रेषण के उदाहरण हैं।

II. धैर्य कौशल (Patience Skill)

धैर्य किसी व्यक्ति की वह क्षमता है जिससे वह बिना बिचलित हुए किसी चीज का अंत तक इंतजार कर सकता है या कुछ उबाऊ महसूस होने पर उसे सह सकता है. धैर्य रखने का मतलब है कि आप तब भी शांत रह सकते हैं जब आप हमेशा से इंतजार कर रहे हो या कोई काम बहुत ही धीमी गति से कर रहे हो. धैर्य हमारी कमजोरियों को दूर करने में मददगार है ईश्वर हमें खुद को बदलने के लिए समय देते हैं ईश्वर पूर्णता की मांग नहीं करते लेकिन वह हमारे लिए हमेशा नई संभावनाओं को खोलते हैं जब हम गिरते हैं तो वह हमें उठाते हैं जब हम रास्ता भटकने के बाद ईश्वर के पास लौटते हैं तो वह खुली भाव से हमारा इंतजार करते हैं.

धैर्य रखने के लाभ (Benefits of keeping patience)

  • धैर्य व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है.
  • धैर्य व्यक्ति के स्वस्थ दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करता है.
  • धैर्य रखने से लोगों में कृतज्ञता की भावना बढ़ती होती है.
  • धैर्य व्यक्ति के खराब रिश्तो को अच्छे रिश्तो में बदल देता है.

III. रचनात्मकता कौशल (Creativity Skill)

रचनात्मकता शिक्षण की एक ऐसी रणनीति है जिसमें विद्यार्थी के पूर्व ज्ञान, आस्थाओं और कौशल का इस्तेमाल किया जाता है। रचनात्मक रणनीति के माध्यम से विद्यार्थी अपने पूर्व ज्ञान और सूचना के आधार पर नई किस्म की समझ विकसित करता है।

इस शैली पर काम करने वाला शिक्षक प्रश्न उठाता है और विद्यार्थियों के जवाब तलाशने की प्रक्रिया का निरीक्षण करता है, उन्हें निर्देशित करता है तथा सोचने-समझने के नए तरीकों का सूत्रपात करता है। कच्चे आंकड़ों, प्राथमिक स्रोतों और संवादात्मक सामग्री के साथ काम करते हुए रचनात्मक शैली का शिक्षक, छात्रों को कहता है कि वे अपने जुटाए आंकड़ों पर काम करें और खुद की तलाश को निर्देशित करने का काम करें। धीरे-धीरे छात्र यह समझने लगता है कि शिक्षण दरअसल एक ज्ञानात्मक प्रक्रिया है। इस किस्म की शैली हर उम्र के छात्रों के लिए कारगर है, यह वयस्कों पर भी काम करती है।

रचनात्मकता निर्धारित सीमाओं से परे सोचने और मूल और अपारंपरिक तरीके से मुद्दों को हल करने का प्रयास है। यह नई चीजों को बनाने, नए विचारों या चीजों को करने के असामान्य तरीके पैदा करने की क्षमता है। Schumpeter ने सुझाव दिया कि उद्यमियों को आगे बढ़ने के लिए विचारों की आवश्यकता होती है, लेकिन विचार शायद ही संयोगवश होते हैं।

IV. उत्साह कौशल (Enthusiasm Skill)

उत्साह का मूल अर्थ होता है प्रेरणा. उत्साह किसी व्यक्ति का वह गुण है जिसके द्वारा उस व्यक्ति की किसी विषय या गतिविधि में गहरी रूचि दिखाने की क्षमता व्यक्त होती है. ऐसे लोग जिनमें कुछ करने के लिए प्रबल उत्सुकता की भावना होती है उन्हें उत्साही लोग कहते हैं. उत्साही व्यक्ति जब तक कि अपने सपने या कार्य को पूरा नहीं कर लेते तब तक हार नहीं मानते. उत्साही लोगों के पास एक आंतरिक प्रेरणा होती है जो उन्हें कार्य करने के लिए प्रेरित करती है. यह लोग तब भी अपना कार्य बड़े जूनून से करते हैं जबकि उन्हें कोई वित्तीय पुरस्कार ना मिल रहा हो. किसी व्यक्ति में उत्पन्न भावनात्मक उत्साह उस व्यक्ति को ऋणात्मक विचारों से लड़ने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है.

V. आत्मविश्वास कौशल (Confidence Skill)

हम अपने अनुभव के आधार पर या अपने प्राप्त ज्ञान के आधार पर कह सकते है कि हम अवश्य सफल होंगे | तब हम उसे आत्मविश्वास कहते है | किन्तु वो बीते हुए कल का सत्य है| आने वाले समय में सत्य सिद्ध हो, ये आवश्यक नही |

आत्मविश्वास (Self-confidence) वस्तुतः एक मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्ति है। आत्मविश्वास से ही विचारों की स्वाधीनता प्राप्त होती है और इसके कारण ही महान कार्यों के सम्पादन में सरलता और सफलता मिलती है। इसी के द्वारा आत्मरक्षा होती है। जो व्यक्ति आत्मविश्वास से ओत-प्रोत है, उसे अपने भविष्य के प्रति किसी प्रकार की चिन्ता नहीं रहती। उसे कोई चिन्ता नहीं सताती। दूसरे व्यक्ति जिन सन्देहों और शंकाओं से दबे रहते हैं, वह उनसे सदैव मुक्त रहता है। यह प्राणी की आंतरिक भावना है। इसके बिना जीवन में सफल होना अनिश्चित है।

VI. समर्पण कौशल (Dedication Skill)

शिक्षण दुनिया में सबसे बढ़िया, रोमांचक और समाज सेवा का कार्य है। एक कुशल शिक्षक के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होतीं लेकिन जो इन चुनौतियों को स्वीकारते हुए छात्र-छात्राओं के सम्मुख नजीर स्थापित करता है, सही मायने में वही एक कुशल और आदर्श शिक्षक है.

शिक्षण में कौशल विकास और समर्पण की आवश्यकता होती है। हम छात्र-छात्राओं को सही तालीम तभी दे सकते हैं, जब हम स्वयं आदर्श भावना को अपने आपमें में समाहित करें। कक्षा में जाने से पहले हमें स्वयं योजना बनानी चाहिए। आपकी नजर और प्रेरणा उन छात्रों तक पहुंचनी चाहिए जोकि अंतिम लाइन पर बैठे हैं। शिक्षक ही छात्रों का प्रेरणा स्रोत होता है, ऐसे में छात्र-छात्राओं का मानसिक विकास करने से पहले उन्हें स्वयं मानसिक रूप से सहज होना जरूरी है। आप बच्चों को जो विषय पढ़ाने जा रहे हैं, उन्हें पहले उस विषय का महत्व बताते हुए उनकी रुचि जागृत करने का आपको प्रयास करना चाहिए। एक कुशल शिक्षक के लिए कमजोर छात्रों से सहानुभूति और उनके कमजोर होने के मूल कारणों को समझना निहायत जरूरी है। इतना ही नहीं समय-समय पर छात्रों को स्कूल-कॉलेज कैम्पस से बाहर ले जाकर उन्हें असल दुनिया से रूबरू कराते हुए उन्हें पढ़ाई का महत्व बताएं और दिखाएं, इससे बच्चे बोरियत से दूर होंगे और सहजता से आपकी बात को समझेंगे।

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